uncha kotda chamunda mataji Temple | चामुंडा माता मंदिर

uncha kotda chamunda mata mandir

uncha kotda chamunda mataji Temple | चामुंडा माता मंदिर


  नमस्कार मित्रों आज हम आपको भावनगर जिले में आए हुए ऊंचाकोटड़ा पर विराजित मां चामुंडा के बारे में बताने वाले हैं उस जगह पर मां चामुंडा कैसे पधारे इतिहास जानने के लिए बने रहे uncha kotda chamunda mataji

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   लोगों के कहने के अनुसार मारवाड़ के अंदर जहां जी भील और उनकी पत्नी मालबाई अपनी कुलदेवी माता चामुंडा की पूजा अर्चना करते थे । माताजी इन दंपति की पूजा अर्चना से उन पर प्रसन्न होते और उनके साथ आत्म चिंतन करते थे । समझ आता मारवाड़ के धरती पर तीन 3 साल तक बारिश नहीं हुई और सारी जमीन सूख गए । उसके आजू बाजू के पशुओं की चिंता होने लगी और उन्होंने माता जी को प्रार्थना की इस दुकाल में यह पशु पक्षी का क्या करें । माताजी ने प्रसन्न होकर भील को काठियावाड़ की धरती मैं समुंदर की ओर जाने के लिए कहा । माता जी की आज्ञा लेकर भील और उनके पत्नी पशुओं को लेकर काठियावाड़ की धरती पर जाने के लिए निकल गए ।

मारवाड़ से गढ़ कोटड़ा कैसे पोहंचे ?


चलते चलते काठियावाड़ के गोहिलवाड़ के गढ़ कोटड़ा गांव में पहुंचे । दोनों दंपत्ति ने माता चामुंडा को प्रार्थना की माताजी ने प्रसन्न होकर उन दोनों दंपत्ति को अपना त्रिशूल दिया और उनको बोला कि इधर मेरे त्रिशूल रखकर स्थापना कीजिए । मेरे को यही वास करना है । माताजी के आदेश के अनुसार जहां जी भील ने माताजी का स्थापन किया और वहां पर माता की पूजा अर्चना करने लगा । उस दोनों दंपत्ति को कोई पुत्र नहीं था । माता जी से प्रार्थना करने पर समय जाते-जाते उनकी पत्नी गर्भवती हुई । परंतु पुत्र का जन्म से पहले जहां जी भील  का मृत्यु हुआ । वालबाई उनकी पत्नी अकेली हो गई ।

गांव के एक अमीर भाई भील की पत्नी को अपनी बहन मानते थे । वह उनको अपने घर ले गए । थोड़ा समय बीतने के बाद उनके घर पर पुत्र का जन्म हुआ । उस पुत्र का नाम माता जी के आशीर्वाद से कालिया भील रखा । पुत्र के जन्म के बाद उसकी माता का भी निधन हुआ । अब आमिर भाई पुत्र को बड़ा करते हैं । कहा जाता है की जब सभी लोग सो जाते हैं तभी रात के समय में पुत्र रोता है तब माता चामुंडा उसको शांत कराती है । ऐसा करते करते हैं कालिया बड़ा हो जाता है । इसकी वजह से आमिर भाई को व मामा कहता है ।

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कालिया भील रोज सुबह उठकर अपने मामा के गाय और भैंसों को चारण के लिए ले जाता था ।एक समय की बात है कालिया भील छोटा  खेल रहा था । तब उसमें से एक भैंस अलग होकर तालाब के अंदर गिर गए कालिया भील ने उस भैंस को बचाने के लिए बहुत कोशिश की । पर वह बचा नहीं सका । फिर उसको सुझाव आया और भैंस को बचाने के लिए तालाब के अंदर गिर गया पर वो खुद ही पानी के अंदर डूब ने लगा । और माता चामुंडा से प्रार्थना करने लगा कि मेरी रक्षा कीजिए । उतने में ही माता चामुंडा एक बूढ़ी अम्मा का रूप लेकर आ गए । कालिया भील अम्मा से कहां की भैंस को बचाने में मैं खुद गिर गया ।

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बूढ़ी अम्मा ने एक चमत्कारी शक्ति से भैंस को तालाब में से बाहर निकाला । और कालिया भील को भी बचाया । कालिया भील ने उनसे प्रश्न किया कि माता आप कौन हो आपको मैंने कई बार मेरी भैंस को चारण करते हुए देखा है । फिर बूढ़ी अम्मा ने अपना मूल स्वरूप दिखाया और कालिया भील को बोला कि तुम तुम मुझको ना पहचान पाए । मैं तुम्हारी कुल की देवी माता चामुंडा । कालिया भील ने वंदन किया । और माता जी से प्रार्थना की कि मेरे को पानी से बहुत डर लगता है पर मेरे को दरिया पर राज करना है । माताजी जोर जोर से हंसने लगे और अपने आशीर्वाद से एक नाव जैसा बना दिया । माता जी का आशीर्वाद कर कालिया भील समुंदर में घूमने लगा। समय जाते-जाते कालिया भील बहुत बड़ा हो गया और उसको जहाज लूटने का मन हुआ ।

कालिया भील ने समुद्र में अंग्रेजो के जहांज क्यों लुटे ?


कालिया भील ने माता चामुंडा से प्रार्थना की और उनको कहा कि मेरे को जहाज लूटने हैं । माताजी ने कहा की जहाज सिर्फ अधर्मी लोगों के लूटना । अच्छे लोगों का मत लूटना । और मेरे आज्ञा के बिना समुंदर में मत जाना । माता जी को प्रणाम करके कालिया भील समुंदर के अंदर जहाजों को लूटने के लिए चला गया । और उसने समुद्र में कई सारे जहाज को लूटे । 1 दिन की बात है कालिया भील ने समुंदर के अंदर जहाज लूटने के लिए माता से प्रार्थना की । परंतु माता चामुंडा ने जहाज लूटने के लिए मना किया । माताजी के आदेश के खिलाफ यह कालिया भील दरिया के अंदर जहाज लूटने के लिए गया । और अंग्रेजों ने उसको पकड़ कर कैद कर लिया । uncha kotda chamunda mataji

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फिर जेल में बैठे बैठे कालिया भील माता जी से माफी मांगता है । और माता जी से प्रार्थना करता है कि है मेरे कुल की देवी चामुंडा मैंने आपकी बात नहीं मानी और मैंने भूल कर ली है मैं मेरे भूल की क्षमा मांगता हूं मेरे को माफ कर दो । माताजी प्रार्थना सुनकर कालिया भील को माफ करते हैं और उनको अंग्रेजों की कैद में से मुक्त कराते हैं । उसके बाद कालिया भील हमेशा के लिए जहाज को लूटना बंद कर देता है ।

कालिया भील को अपनी गलती का पस्ताव हुआ।


    जहाज लूटना बंद करने के बाद कालिया भील वापस गड्ढे कोटडा आ गया । वहां पर माता जी की भक्ति करने लगा । माता जी का सतत उनके साथ रहने की वजह से कालिया भील को अभिमान आ गया । चैत्र मास की नवरात्रि का समय होता है तब कालिया भील माताजी का नैवेध  लेने के लिए महुआ गांव जाता है । महुआ गांव में निवेश लेकर वापस कोटडा आता है । माता चामुंडा कालिया की परीक्षा करने के लिए बूढ़ी अम्मा का रूप धारण किया । कालिया भील वहीं से गुजर रहा था उस बूढ़ी अम्मा ने कोटडा जाने के लिए मदद मांगे क्योंकि उनसे चला जाता नहीं था । कालिया भील ने बूढ़ी अम्मा को मना कर दिया और बोला कि मेरे बेल गाड़ी के अंदर माता जी के नैवैध है अगर मैं तुमको अपने बैलगाड़ी में बैठा हूं ना तो मेरे को पाप लगेगा ।

चामुंडा माता ने परीक्षा क्यों ली ?

और आप से चला नहीं जाता तो घर में बैठे रहिए ऐसे कटु वचन बोलकर कालिया भील निकल गया । माता चामुंडा ने वापस एक चाल चली उन्होंने एक 16 साल की एक सुंदर स्त्री का रूप धारण किया और रास्ते में खड़े रहे और कालिया भील से कहा कि आपके बैलगाड़ी में मेरे लिए जगह है अगर जगह है तो  मुझको कोटडा तक ले जाओ । कालिया भील नी बैलगाड़ी रुक कर कहा  हां हां क्यों नहीं आपके लिए मेरे बैलगाड़ी में जगह ना होए ऐसा बनी नहीं सकता । ऐसा बोलकर कालिया भील नी सुंदरी को अपनी बैलगाड़ी में बिठा लिया आगे जाते जाते कालिया की नजर बिगड़ती गई । और सुंदर स्त्री पर कुदृष्टि डाली ।

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उतने में जोर से आकाश में से बिजली गिरी और माता चामुंडा ने अपना रौद्र रूप धारण कर लिया । और कालिया भील को बैलगाड़ी में से नीचे फेंक दिया और माता ने कहा कि तुम मुझको ना पहचान पाए जब तू छोटा था तो हर मुश्किल में मैंने तेरा साथ दिया । और तूने मेरे पर दृष्टि डाली । तेरे पापा की भक्ति की वजह से मैंने तेरी सभी भूल माफ कर दी थी  । माताजी की क्रोध के वजह से कालिया भील का अभिमान और बस अभी ठंडा हो गया ।

कालिया भील का अभिमान कैसे टुटा ?

फिर माता से वापस माफी मांगने लगा और कहां की है मां मेरे को माफ कर दो मैं आपको पहचान नहीं पाया फिर माताजी ने बताया कि तू तो अब नहीं बचेगा पर तेरा नाम अमर रहेगा ऊंचा कोटड़ा के अंदर कालिया भील की चामुंडा नाम से प्रसिद्ध होगा तू । और बैलगाड़ी अपने आप कोटड़ा गांव पहुंच गई और कालिया भील भटकते भटकते हुए कोटडा पहुंचा । परंतु वह ज्यादा जी नहीं सका । और थोड़े समय के बाद उसने अपना देह छोड़ दिया ।  पर माता जी के वचन के अनुसार ऊंचा कोटडा वाली कालिया भील की माता चामुंडा नाम से प्रसिद्ध है चैत्र मास की नवरात्रि पर दूर-दूर से लाखों की संख्या में श्रद्धालु लापसी के प्रसाद की मानता पूरी करने के लिए आते हैं । 

How to reach Uncha Kotda Chamunda Mata Temple ?

• By Air

Nearest Airport is Bhavnagar 88km.

• By Train

Nearest Railway Station is Mahuva Junction 26km and Bhavnagar Terminus 89km.

• By Road

Nearest Bus Stop is Mahuva 25km and Bhavnagar 89km.

Uncha Kotda Chamunda Mata Temple to Bagdana is 37km.

  • Uncha Kotda Chamunda Mata Temple to Ahemdabad is 255km.
  • bhavnagar to unchakotda 87.km
  • uncha kotda to sarangpur 168km
  • uncha kotda to rajkot 230 km

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