Mahakaleshwar Ujjain Darshan Time महाकालेश्वर दर्शन समय

Mahakaleshwar Ujjain Darshan Time महाकालेश्वर दर्शन समय


मंदिर खुलने का समय ?

Mahakaleshwar Ujjain

morning 4:00 बजे से रात के 11:00 बजे तक

भस्म आरती 4:30 to 6:30 AM

दद्ध्योदयक आरती 7:30 to 8 15 AM

भोग आरती 10 :30 to 11:15 AM

संध्या आरती 6:30 to 7:15 PM

शयन आरती 10:30 to 11:00 PM

Mahakaleshwar Bhasmarti महाकालेश्वर भस्म आरती !


                    firstly  उज्जैन नगरी में भगवान महाकाल को भस्म चढ़ाई जाती है.हजारों साल पहले महाकाल भगवान को चीता की घटना चढ़ती थी. किसी कारण से 1 दिन उज्जैन नगरी में चीता नहीं जली. फिर पूजा जी ने अपने पुत्र की भस्मा भगवान महाकाल पर चढ़ा दी. पुजारी जी ने भगवान को प्रार्थना की कि आज से मैं आपकी भस्मारती बंद कर रहा हूं

secondly .आने वाले समय में चिता ना जले तो अपने पुत्र की कोई भस्म नहीं चढ आएगा. ऐसी भगवान से प्रार्थना कर कर पुजारी ने  चिता की भस्म आरती रोक दी. आज के समय में भस्म आरती गाय के गोबर के कंडे को जलाकर वैदिक मंत्रोच्चारण से शुद्ध की जाती है. और उस बस में को भगवान महाकाल पर अर्पित करते हैं. गोबर के अंदर बैक्टीरिया होते हैं. माना जाए तो वह भस्म में हो जाते हैं.

महाकालेश्वर दर्शन समय भस्म आरती की पूजा सुबह 4:00 बजे से 6:00 बजे तक चलती है .भस्मा आरती करने के लिए आपको bhasmaarti booking कराना अनिवार्य है. भस्मा आरती का बुकिंग आपको 1 दिन पहले कराना पड़ता है.अगर

Mahakaleshwar Ujjain Bhasma Arti

आप भस्म आरती का बुकिंग ऑनलाइन करेंगे तो आपको 100 /- शुल्क देना पड़ेगा अगर आप ऑनलाइन बुकिंग नहीं कर रहा है तो महाकालेश्वर मंदिर में भी व्यवस्था है बुकिंग के लिए वहां निशुल्क बुकिंग होता है बुकिंग के लिए आईडी प्रूफ अनिवार्य है

भस्मा आरती में जाने के लिए पुरुष को धोती पहनना अनिवार्य है. और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है. but जब भगवान महाकाल को भस्म में चढ़ाई जाती है तब महिलाओं घुंघट निकालना पड़ता है. Mahakaleshwar Ujjain Darshan महिलाएं भस्मारती नहीं देख सकती.के 12:00 बजे से भस्म आरती के लिए लोग लाइन मैं लग जाते हैं.

भक्तों पूरी रात भगवान महाकाल के पट खुलने का इंतजार करते हैं. and और सुबह 4:00 बजे भगवान महाकाल के पट खुलते हैं.Mahakaleshwar Ujjain Darshan भस्मा आरती से पहले भगवान महाकाल को पंचामृत से अभिषेक किया जाता है. फिर भगवान महाकाल का श्रृंगार किया जाता है. ऐसा भी क्या बिजी मंत्रोच्चार से होती है. और मंत्रोच्चार से भगवान महाकाल को भस्म में समर्पित की जाती है. हे भगवान महाकाल की आरती होती है. 

-> भगवन महाकाल की कहानी जानने के लिए यहाँ click करे |

Mahakaleshwar dadhiyodiyak Arti | महाकालेश्वर दद्ध्योदयक आरती

   भस्मा आरती के बाद    dadhiyodiyak Arti दद्ध्योदयक आरती होती है| इस आरती में वापस से भगवान महाकाल का पंचामृत से अभिषेक किया जाता है| और भगवान महाकाल का चंदन और गुलाल से श्रृंगार किया जाता है| श्रृंगार होने के बाद भगवान महाकाल को दई और चावल  का भोग चढ़ाया जाता है | फिर भगवान की आरती होती है| 

Bhog Arti | भोग आरती महाकालेश्वर

     10:30 से 11:15 तक भगवान महाकाल की भोग आरती होती है| इस आरती में वापस भगवान महाकालेश्वर का दूध दही शहद से भगवान महाकाल का अभिषेक किया जाता है| फिर वापस चंदन और गुलाल से भगवान महाकाल का श्रृंगार होता है| Mahakaleshwar Ujjain Darshan श्रंगार हो जाने के बाद भगवान महाकाल को भोग  चढ़ता है|

भोग  के अंदर पांच लड्डू रोटी दाल चावल तीन प्रकार के साथ तुलसी के साथ भगवान महाकाल को चढ़ाया जाता है| भोग  चढ़ाने के बाद भगवान महाकाल की आरती होती है| आरती हो जाने के बाद जलाभिषेक होता है| 

Mahakaleshwar Sandhya Arti | महाकालेश्वर संध्या आरती

  शाम को 5:00 बजे भगवान महाकालेश्वर का पूजन होता है Mahakaleshwar Ujjain Darshan उसमें वापस से भगवान का अभिषेक होता है| आरती हो जाने के बाद संध्या आरती के लिए श्रृंगार की तैयारी  होती है| वहां के पुजारी बड़े ही आकर्षक भगवान महाकाल का शिकार करते हैं| श्रृंगार के कई प्रकार है| भांग श्रंगार, चंदन श्रृंगार, सूर्य श्रृंगार, अर्धनारेश्वर श्रृंगार, भात श्रृंगार जैसे भगवान पर किए जाते हैं| 

 कालिदास ने अपने ग्रंथ में बताया की हे मेघ जब उज्जैन जाना तब भगवान महाकालेश्वर के दर्शन अवश्य करना| और भगवान महाकाल की संध्या आरती जरूर करना| भगवान महाकाल की आरती में  श्रृंगार होने के बाद पूजन होता है और ढोल नगाड़े डमरु से भगवान महाकाल की आरती होती है| वह आरती का टाइम बहुत ही आनंदमय होता है| 

MAHAKAL SANDHYA ARTI

Shayan Arti | शयन आरती |

       संध्या आरती के बाद रात को 10:30 बजे भगवान महाकाल की शयन आरती होती है ।Mahakaleshwar Ujjain Darshan महाकालेश्वर मंदिर में महाकाल ग्रुप है उस ग्रुप के अंदर 50 से लोग होंगे वह भगवान महाकाल की आरती करने के लिए आते हैं और भगवान महाकाल की मंत्र से आरती करते हैं|  और उस आरती में ढोल नगाड़े और डमरु का उपयोग किया जाता है । आरती हो जाने के बाद भगवान महाकाल दर्शन के पट बंद किए जाते हैं । और भगवान का श्रृंगार  निकालते हैं| फिर मंदिर के पट बंद हो जाते हैं| 

MAHAKALESHWAR SAYAN ARTI

Mahakaleshwar Bhojnalay : महाकालेश्वर भोजनालय |

  महाकालेश्वर मंदिर में बाहरजाने के दरवाजे से पहले एक काउंटर है वहां से भोजन के लिए निशुल्क पास मिलता है मंदिर के पीछे ही भगवान महाकालेश्वर की धर्मशाला है और भोजनालय है और ठहरने के लिए  पहली धर्मशाला भोजनशाला के बाजू में और दूसरी धर्मशाला हरसिद्धि माता मंदिर के बाजू में है


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