harsiddhi mata Koyla dungar History |हरसिद्धि माता इतिहास

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harsiddhi mata Koyla dungar History |हरसिद्धि माता इतिहास


कोयला डूंगर हरसिद्धि माता मंदिर देवभूमि द्वारका जिला में हर्षद गांव में आया हुआ है । यहां पर माताजी अपने आप विराजमान हुए हैं । तो चलिए दोस्तों हम जानते हैं यह चमत्कारी मंदिर के इतिहास के बारे में ।

शंखासुर का द्वारका वासी को परेशां करना।


   हजारों वर्ष पूर्व की यह बात है । जब भगवान श्री कृष्णा मथुरा नगरी से द्वारका आए थे तब इधर द्वारका के बाजू में बेड द्वारका नाम का द्वीप है । वहां पर एक राक्षस रहता था । वह राक्षस द्वारका के वासियों कृष्ण भगवान के सेवक लोगों को परेशान कर रहा था । द्वारका वासी इस राक्षस से बचने के लिए भगवान श्री कृष्ण के पास गए और इस राक्षस से बचाने के लिए प्रार्थना की ।

यह राक्षस का नाम शंखासुर था । इस राक्षस को अमर होने का वरदान था । भगवान श्री कृष्ण ने इस दुष्ट राक्षस को मारने के लिए बहुत कोशिश की तो भी यह राक्षस से पराजय हो गए ।   माता हरसिद्धि भगवान श्री कृष्ण की कुल की देवी मानी जाती है ।

भगवान कृष्णा ने अपने कुलदेवी से प्राथना की।

इस राक्षस से बचने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने अपनी कुलदेवी माता हरसिद्धि को प्रार्थना की । प्रार्थना कोयला डूंगर पर की । भगवान श्री कृष्ण के भक्ति को देखकर माता हरसिद्धि प्रसन्न हो गए । माताजी ने श्री कृष्ण भगवान को दर्शन देकर बोला कि भगवान आप तो त्रिभुवन नाथ हो सर्वशक्तिमान हो और आपने मुझको याद किया ? तब भगवान श्रीकृष्ण ने माता को विनती की कि बेट द्वारका में बसे शंखासुर राक्षस को हराने के लिए आपकी सहायता चाहिए ।

माता हरसिद्धि का प्रसन्ना होना।


    माता हरसिद्धि ने वचन दिया कि जब आप लोग यादव के साथ उस दुष्ट राक्षस को हराने के लिए जाओगे तब समुद्र किनारे खड़े होकर मेरा नाम लेना और मुझको याद करना । तब मैं आप लोगों की मदद करने के लिए आ पहुंचुंगी ।भगवान श्री कृष्ण के माता जी का आशीर्वाद लेकर और सभी ब्राह्मणों को लेकर कोयला डूंगर की चोटी पर पहुंच गए और माताजी के आदेश के अनुसार माताजी को याद किया । और भगवान श्री कृष्णा और शंखासुर के बीच प्रचंड युद्ध हुआ और माता जी की आशीर्वाद और रक्षा से भगवान श्री कृष्ण का विजय हुआ । और द्वारका वासियों में वापस खुशियों का माहौल आ गया । तब से उस कोयला डूंगर पर माता हरसिद्धि का मंदिर स्थापित हुआ वहां पर सिद्धि माता साक्षात विराजमान है ।

समुद्री व्यापारी क्यों माता हरसिद्धि को नारियल अर्पण करते हे ?

 ऐसी लोक मान्यता है कि समुद्र व्यापारियों जब अपना जहाज लेकर व्यापार करने के लिए जाते हैं और बीच में यह हरसिद्धि माता का मंदिर आए तो माता को याद करके एक नारियल अर्पित करना होता है । माता जी को नारियल चढ़ाने से आगे की यात्रा में कोई रुकावट आती नहीं है ।  एक समय की बात है कच्छ के व्यापारी जगदूसा  और उनके 7 जहाज को लेकर व्यापार करने के लिए निकला परंतु वह कोयला डूंगर हरसिद्धि माता के मंदिर के सामने आकर माता जी को श्रीफल चढ़ाना भूल गया । उसी वजह से उनके 6 जहाजों समुद्र के अंदर डूब गए । सातवा जहाज बचाने के लिए जगडूसा सेठ ने माता हरसिद्धि को सच्चे मन से प्रार्थना की ।

सेठ की सच्ची प्रार्थना से माता हरसिद्धि प्रसन्न हो गए । और उसको वरदान मांगने के लिए कहा । सेठ जगदुसा ने कहा कि आप कोयला डूंगर से डूंगर के नीचे पधारिये । आज के बाद जहाज समुद्र में ना डूबे ऐसा कीजिए । माता हरसिद्धि ने इस सेठ  की परीक्षा ली । माता हरसिद्धि सेठ की इस बात के लिए राजी हो गए और उनकी एक शर्त थी की मेरी डूंगर की सारी सीढ़ियों पर बलि चढ़ा नी पड़ेगी । सेठ ने माताजी की शर्त को मान लिया ।

सेठ ने अपने बेटे और पत्नी की बलि क्यों दी ?


       माता जी के कहने के अनुसार सेठ ने डूंगर के सारी सीढिया पर पशु की बलि चढ़ाता गया । परंतु आखरी 4 सीडीओ में बलि की कमी रह गई । जग्दुसा सेठ ने अपने बेटे और अपने दो पत्नियों की बलि दे दी । आखिर में माता हरसिद्धि सेठ की भक्ति देखकर प्रसन्न हो गए । और माता हरसिद्धि ने सेठ के बेटे और उनकी दोनों पत्नियों को वापस से जीवनदान दिया । और उसके बाद कोयला डूंगर के नीचे माता हरसिद्धि का मंदिर का निर्माण हुआ । आज के समय में भी यह मंदिर का बहुत बड़ा महत्व है ।

harsiddhi mata koyla dungar darshan timing

Morinng – 6 AM to 8 : 00 PM

Harsiddhi mata koyla dungar arti timing

Morning – 6:30 AM

Evening – 7:00 PM

How to reach harshiddi mata koyla Dungar?

• By Air

Nearest Airport is Jamnagar 129km and porbandar 44 Km

• By Train

Nearest Railway Station is Dwarka 64km and probandar 43km

• By Road

Nearest Busstop is Dwarka 64km and pobandar 46 km

Dwarka to Harshiddi Mata Koyla Dungar is 64km

  • Jamnagar to Harshiddi Mata Koyla Dungar is 135km
  • Junagadh to Harshiddi Mata Koyla Dungar is 147km
  • Rajkot to Harshiddi Mata Koyla Dungar is 222km
  • probandar Harshiddi Mata Koyla Dungar is 44 KM

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