Bhavnath Mahadev Temple – Junagadh | भवनाथ महादेव मंदिर गुजरात

Bhavnath Mahadev Temple – Junagadh | भवनाथ महादेव मंदिर गुजरात


Bhavnath Mahadev Temple story in Hindi | भवनाथ मंदिर इतिहास।

Bhavnath Mahadev – हजारों वर्ष पहले की यह बात है। 1 दिन भगवान शिव कैलाश पर बैठे थे। थोड़ी देर में ब्रह्मा जी कैलाश पधारे । और भगवान ब्रह्मा ने शिव को पृथ्वी लोक में जाकर सभी जीव के कल्याण करने की प्रार्थना की। वहां पर सभी जीव परेशानी में थे। भगवान शिव पृथ्वी वासी की मदद करने के लिए तैयार हो गए। और उन्होंने अपने दिव्य दृष्टि धरती माता पर डाली। नजर डालते ही जंगलों से घिरा हुआ गिरनार पर्वत दिखा। और भगवान शंकर वहां जाकर बस गए । भगवान ने उधर कई साल तपस्या की और सभी जिवो का कल्याण किया।

माता पार्वती कैलाश पहुंची हजारों साल हो जाने के बाद भी भगवन शंकर घर नहीं आए। इतने माता पार्वती चिंता में आ गई। फिर उन्होंने नारद मुनि से पूछा कैलाश नाथ शिव किधर है । नारदजी ने माता पार्वती को बताया कि ब्रह्मा जी ने भगवान शिव को पृथ्वी लोग जिवो का कल्याण करने के लिए भेजा है। यह बात सुनकर माता पार्वती भगवान शंकर को ढूंढने पृथ्वी लोक चले गए।

माता शिव को गिरनार क्षेत्र में ढूंढ रही थी। और वह भी गिरनार के जंगल में भगवान शिव के ध्यान में लग गई। माता के साथ नारद मुनि और 33 कोटि देवता भी ध्यान में जुड़ गए। तपस्या करने के बाद भगवान शिव ने प्रमाण के रूप में अपना मृग वस्त्र फेका।

इस वस्तुओं को देखकर माता पार्वती को प्रमाण मिल गया कि भगवान शिव यही है। और भगवान शिव स्वयंभू(Bhavnath Mahadev) प्रकट हुए। और बोला कि मैं पृथ्वी लोक में सभी जिवो का कल्याण करने के लिए में यही रहूंगा । और उनके साथ साथ माता पार्वती भी यहीं ठहर गई।

Mrugi kund Junagadh story | मृगी कुंड जूनागढ़ कहानी ?

भवनाथ महादेव के बाजू में एक पवित्र कुंड हे । उसका नाम मृगी कुंड हे। कहीं सो साल पहले की बात है कि जब राजा भोज जंगल के अंदर शिकार करने के लिए निकले थे तब उन्होंने हिरण का झुंड देखा। और उस हिरण के झुंड के अंदर एक अलग प्रकार का हिरण था। वह हिरन आधा स्त्री जैसा दिखता था ।

राजा ने अपने सैनिकों को उस हिरण को पकड़ के लाने का आदेश दिया। कई दिनों की मेहनत के बाद यह हिरण पकड़ में आया। फिर राजा भोज ने पंडित और ऋषि को बुलाया। और इस हिरण का ऐसा रूप होने का कारण जानने के लिए कहा। इन लोगों से कोई भी मार्ग और संकेत नहीं मिला। राजा चिंतित थे। फिर राजा ने कुरुक्षेत्र के अंदर तप करते उद्वारिता नाम के ऋषि को इस परेशानी का हल निकालने के लिए प्रार्थना की ।

mrugi dear | हिरण का मृग रूप ?

ऋषि ने राजा को बताया कि पिछले जन्म में राजा भोज सिंह थे और यह मृग हिरन हिरन था। उस जन्म में यह सिंह उस हिरण का शिकार करने के लिए भागा। और हिरन अपनी जान बचाने के लिए दौड़ा। भागते भागते हिरण का मस्ती झाड़ियों में फस गया । और उसका आधा शरीर पवित्र नदी में गिर गया। नदी का पानी पवित्र होने की वजह से उस शरीर के भाग को मनुष्य अवतार मिला। और उसका मुख झाड़ियों में फंसे रहने की वजह से आधा हिरण और आधा मनुष्य जैसा अवतार मिला।

Mrugi Kund Junagadh | मृगी हिरन का सुंदरी बन जाना ?

ऋषि ने राजा को कहा कि पिछले जन्म में हिरन का मुख जिस झाड़ियों में फंसा है उसको ढूंढने का आदेश दिया। बड़ी मेहनत के बाद उस हिरण की खोपड़ी मिली । और उस मस्ती को पवित्र नदी में पधरा दिया। मस्तीक पधराने के बाद राजा ने उस हिरण को पवित्र नदी में स्नान करवाया । पवित्र नदी में स्नान करने के बाद आधा हिरन और आधा मनुष्य दिखने वाली हिरन सुंदर कन्या का रूप ले लिया । और राजा ने उस सुंदर कन्या से शादी करि । और राजा ने कुंड बनवाया उस कुंड के अंदर भारत की 42 पवित्र नदियों का जल ला कर यह कुंड बनवाया।इस लिए यह पवित्र कुंड को मृगी कुंड से जाना जाते हे।

bhavnath mahadev fair in hindi | भवनाथ महादेव मेला।

गिरनार पर्वत की गोद में बस्ता है भवनाथ। यहां हर साल शिवरात्रि के 5 दिन पहले साधु और संतों का आगमन हो जाता है।पूरे देश भर में से अलग-अलग अखाड़ा और श्रद्धालु नागा साधु के दर्शन करने के लिए आते हैं। और अपनी अपनी शक्तियों के अनुसार साधना करते हैं। शिवरात्रि के पर्व पर भवनाथ का विसिष्ट महत्व हे। यहां मेला शिवरात्रि की पूरी रात चलता है। और यहां पर मृगी कुंड है वहां पर साधु-संतों पवित्र डुबकी लगाते हैं। यह कुंड पूरे साल में 4 घंटे के लिए खोला जाता है।

यह कुंड शिवरात्रि की मध्यरात्रि को साधु संतों के स्नान के लिए खोला जाता है । श्रद्धालु और साधु संतों का मानना है कि इस कुंड में स्नान करते नागा साधु के बीच भगवान शंकर भी स्नान करने के लिए आते हैं। स्नान करने के बाद पूरी रात भर यहां मेला चलता है। रात भर मेले में साधु संतों अलग-अलग प्रकार के करतब दिखाते हैं और श्रद्धालुओं का मनोरंजन करते हैं । नागा साधुओं संसार का सारा सुख छोड़कर भगवान की भक्ति में लग जाते हैं । और अपना पूरा जीवन भगवान के पीछे लगा देते हैं। इस मेले के अंदर बहुत ही चमत्कारी और दिव्य साधुओं का आगमन होता है ।

lili parikrama junagadh | लिली परिक्रमा।

विजयदशमी के 5 दिन के बाद एकादशी के दिन यहां लिली परिक्रमा होती है। हजारों श्रद्धालु पूरे देश में से आते हैं। और इस पवित्र परिक्रमा में भाग लेते हैं। यह परिक्रमा मैं पूरे गिरनार पर्वत की परिक्रमा की जाती है।

lili parikrama km | लिली परिक्रमा किलोमीटर ?

यह 37 KM लंबी होती है। यह परिक्रमा की शुरुआत भवनाथ मंदिर के दर्शन से होती है। यह परिक्रमा का रास्ता जंगल में से है। रास्ते में जाते जाते जंगली जानवर भी मिलते हैं और झरने और अलग-अलग प्रकार की वनस्पति भी देखने के लिए मिलती है।

रास्ते में यात्री को खाने-पीने और ठहरने के लिए तंबू लगाए होते हैं। यहां पर श्रद्धालु आकर निस्वार्थ भाव से सेवा देते हैं । यह परिक्रमा भवनाथ से सुरु हो कर 2 ) इंद्रेश्वर 3 ) इंटवागोड़ी 4 ) जीना बाबा के मंडी 5 ) सकार्डिया हनुमान जी 6 ) सूरजकुंड 7 ) नारा पानी 8 ) बोरदेवी होकर वापस भवनाथ आती है। यह रास्ते पर भक्तों और श्रद्धालु गिरनार पर्वत की प्रदक्षिणा करते हैं ।

How To Reach Bhavnath From Junagadh ?

junagadh to bhavnath – 8 KM.

Rajkot to Junagadh – 113 KM.

ahemdabad to junagadh – 436 km .

How to reach Junagadh ?

Train – junagadh has there Own railwaystation which 10 km away from bhavnath

Bus – junagadh bus stand,

Road – Junagadh Rajkot Highway .

bhavnath mahadev darshan


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